नमस्कारम्
हमारे भारतीय समाज में आज कल बहुत से युवा पश्चिम जाकर मनोविज्ञान की पढ़ाई करते है | आज पश्चिम की पूरी सभ्यताएँ मनोविज्ञान पर टिकी हुई है | अगर आप इस कड़ी को पकड़ ले तो पूरा पश्चिम नष्ट हो जाएगा | पश्चिम की सभ्यता में एक से एक philosopher और मनोवैज्ञानिक रह चुके हैं जैसे. Frieds,Socrates इत्यादि| यह जितने भी महान लोग पश्चिम मै पैदा हुए इन सब लोगों ने इंसान के मस्तिष्क और उनके हाव भावो पर काफी कार्य किया | जो कि एक पशु को मनुष्य बनाने की पहली यात्रा है | अगर आप आज यूरोप को देखोगे तो वो सच मै इंसान बन कर जी रहे है और आज भारत के लोगों की जिंदगी पशु बन कर रह गयी है |
आज के समय में यूरोप में आपको सांसारिक सुख काफी आसानी से मिल जाऐंगे वह भी बिलकुल वैध तरीको से | वहाँ के लोग मानसिक ओर शारीरिक सुख में जी रहे हैं क्योंकि वे लोग प्रकृति के बनाए हुए नियमो से जीवन को व्यतीत कर रहे है | भले ही वे बाहरी आयाम के बारे में कितना भी जानते हो परंतु उनकी सभ्यताओं द्वारा की गई सबसे आधुनिक खोज सिर्फ मानसिक तल तक ही हो पाई है | वे अपना पूरा जीवन अपनी खोज के आधार पर व्यतीत कर रहे है जिस वजह से वो हमसे ज्यादा सुखी रहते है | अब इन चीजो को जिंदा रखने के लिए उन्हें मनोवैज्ञानिको की जरूरत पड़ती है |
भारत की तो बात ही अलग है | भारत की सभ्यताए इतनी आधुनिक रह चुकी है कि उन्होंने कुछ ऐसी तकनीकें खोज निकाली थी जिससे वे मानसिक और शारीरिक सुख से ऊपर उठ चुके थे | कुछ ऐसे तरीके जिससे इंसान भगवान बन जाता था |
मनोविज्ञान सिर्फ एक ही तल पर कार्य करता है जो है मानसिक तल लेकिन गौरतलब बात यह है कि जैसे जैसे मनुष्य का विकाश होता गया वो बदलता गया पश्चिम के लोग शारीरिक सुख से मानसिक सुख की ओर बढे |
जब पूरी दुनिया शारीरिक सुख में जी रही थी तब भारत के अंदर आध्यात्मिक उन्नतिया हो चुकी थी और इसका प्रबल रूप आप बुध्द के वक्त में देख सकते है | मानसिक सुख उन्हे कुछ समय के लिए पूरी दुनिया से दूर रखता है |
आज के युग में पश्चिम पूर्ण रूप से मानसिक सुख में जी रहा है जैसे पश्चिम में एक रिवाज है live in relationship का आप इसके बारे में बखूबी जानते ही होंगे | अब आपको कोई स्त्री पसंद आ गई और आप दोनो फिर live in relationship मै रहे | यह जो लिव इन रिलेशनशिप है यह पूर्ण रूप से सैक्स पर आधारित रिशता है |
हमारे भारत में आध्यात्म मौजूद है जिससे कोई भी इंसान भगवान बन सकता है | इसलिए भारत की जो महान सभ्यताएँ रही उन्होने आध्यात्म को बहुत विकसित किया | जिसका बाद में अंग्रेजो ने नाश कर दिया जिसके बाद ना हम पूर्ण भारतीय रह पाए और ना अंग्रेज बन पाए |
जय हिंद
Report by-महर्षि मैकौलम
